हर साल 4 फरवरी विश्व कैंसर दिवस मनाया जाता है. यह दिवस कैंसर के बारे में जागरूकता बढ़ाने, लोगों को शिक्षित करने, इस रोग के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए दुनिया भर में सरकारों और व्यक्तियों को समझाने तथा हर साल लाखों लोगों को मरने से बचाने के लिए मनाया जाता है। 2014 में इसे विश्व कैंसर घोषणा के लक्ष्य 5 पर केंद्रित किया गया है जो कैंसर के कलंक को कम और मिथकों को दूर करने से संबंधित है। कैंसर कई प्रकार के होते है.
ओरल कैंसर
माउथ कैंसर या ओरल कैंसर (Oral Cancer) में जीभ, मसूढ़ों, गालों, तालु, टॉन्सिल या गले के पिछले भाग के कैंसर शामिल होते हैं। ओरल कैंसर देश में पुरुषों को होने वाले सबसे सामान्यक किस्मा के कैंसर में से है। महिलाओं के मामले में, यह 5 सबसे सामान्य कैंसर में से है। हर साल, 80,000 से अधिक लोगों में ओरल कैंसर की पुष्टि होती है और इनमें से 60 फीसदी मरीज़ ओरल कैंसर के चलते असमय मौत का शिकार बनते हैं। यही कारण है कि हमें ओरल कैंसर के कारणों (Causes of Oral Cancer) तथा लक्षणों/संकेतों के बारे में जागरूक (Oral cancer Awareness) होना चाहिए।
क्या है ओरल कैंसर का सबसे बड़ा कारण?
ओरल कैंसर का सबसे बड़ा कारण तंबाकू का सेवन है। तंबाकू का सेवन, सिगरेट-बीड़ी पीने, तंबाकू का पान चबाने, तंबाकू-गुटखा आदि चबाने जैसे कई तरीकों से किया जाता है। इसके अन्यर कारणों में एचपीवी (HPV) जैसे वायरस इंफेक्शमन भी शामिल हैं। कई बार, धूप में अत्येधिक रहने से भी होंठों का कैंसर (Lip Cancer) होता है। उम्र बढ़ने के साथ-साथ कैंसर का खतरा भी बढ़ता है। तंबाकू का सेवन बंद करने से ओरल कैंसर का खतरा 90 फीसदी तक कम हो सकता है।
पहचानिए ओरल कैंसर के इन 3 संकेतों को
मुंह में होने वाले कैंसर के आरंभिक लक्षणों में कई तरह के संकेत शामिल हैं। हालांकि निम्नर संकेतों/लक्षणों के दिखायी देने पर हमेशा कैंसर ही हो, ऐसा जरूरी नहीं होता, लेकिन यदि ये बने रहें तो किसी योग्य़ चिकित्साक से अपनी जांच अवश्य करवाएं।
1. खिचखिच या मुंह, होंठ अथवा गले में कड़ापन महसूस होना
गले या मुंह में दर्द, खिचखिच या मुंह, होंठ अथवा गले में कड़ापन महसूस होना। कई तरह के संक्रमणों के कारण गले में दर्द महसूस होता है। ऐसा साधारण वायरल इंफेक्शिन की वजह से भी हो सकता है। लेकिन अगर यह ज्यामदा देर तक टिका रहे तो जांच अवश्यल करवाएं। कई बार यह कैंसर या प्रीमैलिग्नेंकट कंडिशन का सूचक भी हो सकता है।
2 सफेद या लाल पैच दिखाई देना
मुंह के अंदर सफेद या लाल पैच दिखायी देने पर तत्काेल जांच अवश्यन करवाएं। सफेद पैच को कई बार ल्यूरकोप्ला्किया कहा जाता है। ल्यू कोप्ला किया से ग्रस्तत 5 से 10 प्रतिशत लोगों में कैंसर हो सकता है। लाल पैच का कारण एरिथ्रोप्ला किया हो सकता है। इससे ग्रस्त 50 फीसदी तक लोगों को बाद में ओरल कैंसर हो सकता है।
यदि शुरुआती चरणों में इनका पता चल जाए तो लगभग सभी मरीज़ों का उपचार किया जा सकता है। इस प्रकार के पैच दिखायी देने पर बायप्सीी जांच की आवश्यतकता हो सकती है। यह जानना जरूरी है कि ऐसे पैच की बायप्सी जांच की वजह से न तो कैंसर बनता है और न ही फैलता है। अलबत्ताा, यह रोग के सही निदान में जरूर सहायता करता है और आवश्य कतानुसार इलाज में भी इससे मदद मिलती है।
3 निगलने या चबाने में परेशानी महसूस होना
चबाने, बोलने, निगलने या मसूढ़ों को हिलाने में अगर कठिनाई महसूस होने लगे तो यह ओरल कैंसर का लक्षण हो सकता है। गालों पर सूजन और गर्दन में उभार या सूजन भी कई बार कैंसर का आरंभिक लक्षण हो सकता है। अक्सलर इस प्रकार की सूजन पीड़ारहित होती है। यही वजह है कि शुरू में लोग अक्सजर इनकी अनदेखी करते हैं। लेकिन दर्द शुरू होने पर ही स्पेरशलिस्ट को दिखाने की प्रवृत्ति के चलते कई बार कैंसर को फैलने के लिए काफी समय मिल जाता है। कभी-कभी ओरल कैंसर के कारण जबड़ा भी हिल जाता है।
घबराएं नहीं जांच करवाएं
यदि उपर्युक्तए में से कोई भी लक्षण या चिह्न दिखायी दें, तो घबराएं नहीं। जरूरी नहीं कि यह कैंसर की वजह से हुआ हो। और यदि कैंसर है तो भी ओरल कैंसर के आरंभिक चरणों में निदान होने पर अधिकांश मरीज़ों का उपचार हो सकता है। शुरू में ही ओरल कैंसर का पता लगना इसका प्रभावी इलाज होता है। अपने चिकित्सनक या डेंटिस्टम अथवा सर्जन/कैंसर स्पेंश्यंलिस्टन से मिलकर कैंसर की आशंका को दूर करें और रोग का सही-सही कारण पता कर उसका इलाज करवाएं।
हमेशा याद रखें, हम मिलकर कैंसर का खात्माक कर सकते हैं।
लक्षणों को पहचानें – इन्हे नज़रंदाज़ नहीं करें, यदि जरूरी हो तो चिकित्सा परामर्श लें और सबसे ज्यालदा महत्वंपूर्ण है कि आप तंबाकू के सेवन से बचें।